उत्तराखण्ड में यहां सालों से प्रज्‍ज्वलित है अखण्ड अग्नि

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भारत में घूमने के लिए बहुत सारी जगह हैं और उसमें भी सबसे ज्यादा यहां तीर्थ स्थान हैं। आज हम आपको घूमने के लिए एक ऐसे तीर्थ स्थल के बारे में बता रहे हैं जहां जाकर आपको रमणीक दृश्य तो मिलेंगे ही साथ ही शांति और ईश्वर का सुखद अनुभव भी प्राप्त होगा। उत्तराखण्ड में कई तीर्थ स्थान हैं जहां हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हरिद्वार से लेकर केदारनाथ और बद्रीनाथ में प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु यहां के तमाम मंदिरों में घूमते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर कई सालों से एक लौ जल रही है। जी हां हरिद्वार में एक ऐसा आश्रम है, जहां यज्ञशाला में कई  वर्षों से अखंड अग्नि प्रज्‍ज्वलित हो रही है।

यहां सुबह दो घंटे यज्ञ होते हैं और फिर लोहे के पट्टे से इसे ढक दिया जाता है। अगले दिन फिर सुबह पट्टे को हटाया जाता है, लकड़ी रखी जाती है और अग्नि प्रज्‍ज्वलित हो जाती है। यहां आज तक माचिस का उपयोग नहीं किया गया।

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज में स्थित है यह कुंड

हरिद्वार में गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज में यह अखंड अग्नि प्रज्‍जवलित है। भारत में अखंड अग्नि का महत्व सर्वाधिक है। साधु-संत सदियों से अखंड धुनि के सामने तप करते देखे जाते रहे हैं, लेकिन शांतिकुंज में बारह महीने हजारों श्रद्धालु दर्शनार्थी यहां दर्शन करने आते हैं। इसके साथ ही हजारों साधना प्रेमी गायत्री साधना के साथ-साथ धर्म-अध्यात्म व विभिन्न स्वावलंबन पर प्रशिक्षण के लिए आते हैं।
ये सभी लोग गायत्रीतीर्थ परिसर के 27 कुंडीय यज्ञशाला में स्थापित इस अखंड अग्नि में रोज सुबह यज्ञाहुतियां प्रदान करते हैं और नौ दिवसीय जप अनुष्ठान की पूर्णाहूति भी इसी अखंड अग्नि में समर्पित करते हैं। यज्ञ का समग्र कर्मकांड वेदोक्त मंत्रों द्वारा देवकन्याओं के स्वर में होता है।

सन्‌ 1926 से प्रज्ज्वलित अखंड दीप यहाँ स्थापित है। आश्रम की तीन विराट यज्ञशालाओं में नित्य नियमित रूप से हजारों साधक गायत्री यज्ञ संपन्न करते हैं। भारतीय संस्कृति के अंतर्गत सभी संस्कार जैसे. पुंसवनए नामकरणए अन्नप्राशन, मुंडन, शिखास्थापन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह, वानप्रस्थ तथा श्राद्ध कर्म आदि यहाँ निःशुल्क संपन्न कराए जाते हैं। इनके व्यावहारिक तत्वदर्शन से प्रभावित होकर यहाँ नित्य बड़ी संख्या में संस्कारों के लिए लोग आते हैं। इसलिए इस बार अगर कहीं घूमने जाने का मन बनाये तो यहां जरूर जायें।

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