Chinghai के प्राइमरी स्कूल में गेसार संस्कृति का उत्तराधिकार

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न के छिंगहाई प्रांत की गात्वो काउंटी में दूसरे प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थी गेसार संस्कृति संबंधी शिक्षा ले रहे हैं। वे ‘राजा गेसार’ महाकाव्य की कथाओं का गायन वाचन करते हुए दिखाई देते हैं। राजा गेसार का जन्म 11वीं शताब्दी में हुआ। उन्होंने दैत्यों और दानवों के साथ संघर्ष करते हुए तिब्बती जाति की रक्षा की।

‘राजा गेसार’ विश्व में सबसे लम्बा ऐतिहासिक महाकाव्य है, जिसका लम्बा इतिहास, महान ढांचा और प्रचुर विषय है, जिसे एक वीर रस की कविता मानी जाती है। महाकाव्य ‘राजा गेसार’ तिब्बती जाति की प्रथाओं, कविताओं और कहावतों के आधार पर पैदा हुई कविता है, जो पुरानी तिब्बती जाति की संस्कृति की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करती है। ‘राजा गेसार’ महाकाव्य वर्तमान विश्व में रखी गई एकमात्र जीवित वीर रस की कविता है, जिसका लोग गान कर रहे हैं। वर्ष 2009 में ‘राजा गेसार’ महाकाव्य विश्व की गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की नामसूची में शामिल की गई है।

छिंगहाई प्रांत की गात्वो काउंटी के दूसरे प्राइमरी स्कूल में सन् 2016 में गेसार संस्कृति के उत्तराधिकार की कक्षाएं खोली गईं, जिनमें पर्यावरण संरक्षण कक्षा, गेसार लिपिकला कक्षा, हाता कथा-वाचन कक्षा आदि नौ कक्षाएं शामिल हैं। कक्षाओं में विद्यार्थी विभिन्न तरीकों से गेसार संस्कृति और पारिस्थितिकी पर्यावरण संरक्षण आदि जानकारी ग्रहण करते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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