क्या आप देहरादून से जुड़े इन रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं ?

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देहरादून भारत के उत्तराखंड राज्य का राजधानी शहर है, जो अपनी अनोखी जीवनशैली, खूबसूरत परिवेश, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के लिए जाना जाता है। इस शहर की भौगोलिक स्थित बेहद खास है, जहां से राज्य के अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों के लिए आराम से जाया जा सकता है। घूमने-फिरने और देखने योग्य यहां बहुत से शानदार स्थल मौजूद हैं, जिनमें बुद्धा टेंपल, एफआराई, रोवर्स केव, सहस्त्रधारा, टपकेश्वर मंदिर, राजाजी नेशनल पार्क, गुरु राम राय दरबार साहिब आदि शामिल हैं। इस शहर का इतिहास कई साल पुराना है, ब्रिटिश काल के दौरान यह एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। एक यादगार अवकाश के लिए यह शहर एक आदर्श विकल्प है। आज इस लेख में हम आपको देहरादून से जुड़े उन रोचक तथ्यों के बारे बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद आपको भी पता न हो। शहर की स्थापना बहुत कम लोग इस विषय में जानते हैं, कि देहरादून की स्थापना 18 शताब्दी के दौरान एक सिख गुरु द्वारा की गई थी। जी हां, और उनका नाम है, गुरु राम राय। माना जाता है कि सिख धर्म के अनुयायियों का दून आगमन 1675 में हुआ था, जहां वे 24 वर्षों तक लगातार रहें। यह वो समय था जब सिखों के सातवें गुरु, गुरु हर राय के बड़े बेटे का यहां का आगमन हुआ था, और तभी दून अस्तित्व में आया। गुरु राम राय के सम्मान में प्रतिवर्ष धामवाला गांव में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है क्या आप देहरादून शब्द का अर्थ जानते हैं? देहरादून दो शब्द से मिलकर बना है, एक देहरा और दूसरा दून। दहरा का अर्थ होता है डेरा, घर या आश्रय और दून उस घाटी का नाम है, जो हिमालय और शिवालिक के मध्य स्थित है। एक पौराणिक स्थल बहुत कम लोगों का पता है कि देहरादून एक पौराणिक स्थल है, जिसका उल्लेख केदार खंड क्षेत्र के एक भूभाग के रूप में स्कंद पुराण में किया गया है, वो क्षेत्र जो भगवान शिव के नजदीक माना जाता है। इस शहर के आसपास आपको बहुत से प्राचीन मंदिर दिख जाएंगे। यह स्थल महर्षि गौतम का निवास स्थान रह चुका है, माना जाता है कि महर्षि गौतम दून में काफी समय तक रहे थे। यहां के चंद्रबानी मंदिर में पास एक कुंड है, जो गौतम कुंड के नाम से जाना जाता है।  बहुत कम लोग जानते हैं कि यह प्राचीन शहर कभी मौर्य साम्राज्य का हिस्सा भी रह चुका है। 273 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक देहरादून अशोक शासन काल के अधीन रहा। प्रमाण के तौर पर राज्य के कलसी क्षेत्र में 1860 के प्राचीन अवशेष देखे जा सकते हैं। रामायण – महाभारत से संबंध  इस शहर का संबंध महाभारत काल से भी है, महाकाव्य में इस शहर का उल्लेख द्रोणनगरी के रुप में मिलता है, द्रोणनगरी यानी गुरु द्रोणाचार्य की नगरी । गुरु द्रोण, पांडवों और कोरवों के गुरु थे। माना जाता है कि लंका से वापसी के दौरान इस स्थल पर भगवान राम और लक्ष्मण का आगमन हुआ था। देरहादून स्थित लक्ष्मण सिद्ध वो मंदिर है, जहां लक्ष्मण ने कभी ध्यान किया था। अंग्रेजों के जमाने के शिक्षण संस्थान  यह शहर काफी समय तक अंग्रेजों के प्रभाव क्षेत्र में रहा, उस दौरान यहां कई संरचनाओं को निर्माण किया गया था। यहां आज भी ब्रिटिश के वक्त से शिक्षण संस्थान देखे जा सकते हैं। जिसमें एफआरआई, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी आदि शामिल हैं।

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