पटकथा को आकर्षित बनाने में माहिर है हिंदी सिनेमा के उम्दा स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट,जानें इनके बारे में

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बॉलीवुड के गलियारों में किसी भी फिलम् के निर्माण में कई आर्टिस्ट कलाकारों की जरुरत होती है उन्ही में से एक आज हम बात कर रहे है हिंदी सिनेमा के मशहूर स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट के बारे में।जी हां किसी भी फिल्म के दृश्यों को विस्तृत ब्योरा देने वाले कलाकारों को स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट कहा जाता है।जो कि फिल्म के हर एक सीन को कैसे शूट करना है कहां और वही किस पर क्या सीन शूट करना है।का लेखा-जखा रखता है।हर किसी फिल्म में स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट की जरुरत होती है आम तौर पर फिल्म के डायरेक्टर ही ये काम करने लगते है जिसे इसकी गहरी समझ होती है।तो आइए बात करते है इन कलाकारो के बारे मेः

राजकुमार हिरानी- नागपुर में जन्में मशहूर भारतीय फिल्म निर्देशक और संपादक राजकुमार हिरानी को खास तौर से भारतीय फिल्म मुन्ना भाई M.B.B.S, लगे रहो मुन्नाभाई, 3 इडियट्स, पीके और संजू का निर्देशन करने के लिए जाना जाता है।इन फिल्मों के डायरेक्शन के साथ ही राजकुमार ने फिल्मों का स्क्रीनप्ले भी खुद संभाला है।जिसके लिए राजकुमार ने अलग से कोर्स किया था।और बाद में इस फील्ड में नजर आए।राजकुमार की हर एक फिल्म इंडस्ट्री में नया पैगाम लेकर आती है जिसके कारण वो इस लिस्ट में पहले स्थान पर है।इसके लिए उन्हें 2007 में लगे रहो मुन्ना भाई के लिए जी सीने और 2004, 2010 में मुन्ना भाई एम.बी.बी एस और 3 इडियट्स के लिए आईफा अवॉर्डस ने बेस्ट स्क्रीनप्ले के अवॉर्ड से नवाजा था।इसके अलावा वो बेस्ट डायलॉग, बेस्ट स्टोरी, और बेस्ट एडिटिंग के लिए भी नवाजे जा चुके है।

सलीम खानः साल 1975 में दीवार और साल 1982 में फिल्म शक्ति के लिए बेस्ट स्क्रीनप्ले के अवॉर्ड से नवाजे जा चुके मशहूर सलीम अब्दुल राशिद खान एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्माता और पटकथा लेखक हैं। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों के कई अनोखी कहानियां लिखी है।खास तौर पर सलीम खान और जावेद अख्तर के एकता के लिए जाना जाता है दोनों जब भी साथ में काम करते है तो फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले में चार चांद लगा देते है।दोनों की जोड़ी बॉलीवुड में एक भारतीय पटकथा लेखन जोड़ी थी।जिन्हें “हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा पटकथा लेखक” टाइटल से भी नवाजा जा चुका है।

जावेद अख्तरः ग्वालियर में जन्में जावेद अख्तर एक भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता, कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैं।जिन्होनें संगीत में जहां अपना रुतबा कायम किया है तो वही इसके अलावा जावेद पद्म श्री, पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और साथ ही पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भी नवाजे जा चुके है।जावेद ने अपने करियर में गान: वंस अपॉन ए टाइम इन इंडिया (2001), ओम शांति ओम (2007) और जोधा अकबर (2008) जैसी फिल्मो का स्क्रीनप्ले किया है और इस बीच इन्हें काफी नवाजा भी गया है।

संजय लीला भंसालीः हिंदी सिनेमा के संजय लीला भंसाली बॉलीवुड निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और संगीत निर्देशक हैं।संजय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म परिंदा में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की थी जिसके बाद वो 1996 में फिल्म खामोशी के डायरेक्शन से पहली बार हिंदी सिनेमा के पर्दें पर आए।संजय खुद अपनी फिल्मों का स्क्रीनप्ले करते है।ना सिर्फ फिल्में बल्कि वो टीवी प्रोगाम सरस्वती चंद्र,एक्स फैक्टर इंडिया और झलक दिखला जा का भी स्क्रीनप्ले कर चुके है।भंसाली को इसके लिए पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, ग्यारह फिल्मफेयर पुरस्कार और बाफ्टा नामांकन मिल चुका है।जहां वो डायरेक्टर होने के साथ ही हिंदी सिनेमा के बेस्ट स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट भी माने जाते है।

अनुराग कश्यपः अनुराग कश्यप एक भारतीय फिल्म निर्देशक, लेखक, संपादक, निर्माता और अभिनेता हैं जो हिंदी सिनेमा में अपने कामों के लिए जाने जाते हैं।यूं तो कई फिल्मों में वो असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके है लेकिन साल 2012 में उन्होनें अपने डायरेक्शन और प्रोड्क्शन से फिल्म गैंगस ऑफ वासेपुर का निर्माण किया।जिसका उन्होनें स्क्रीनप्ले भी किया था।ये एक सुपरहिट फिल्म थी जिसे काफी पसंद किया गया।इसके अलावा इस फिल्म के लिए उन्हें फ्रांस सरकार ने उन्हें 2013 में ऑर्ड्रे डे आर्ट्स एट डे लेट्रेस से सम्मानित किया था।जो कि एक ब़ड़ी उपलब्धि है।

अभिजीत जोशीः3 इडियट्स (2009), लगे रहो मुन्ना भाई (2006) और पीके (2014) के लिए जाने जाने वाले अभिजीत जोशी एक लेखक और अभिनेता हैं। जिन्हें विशेष रूप से विनोद चोपड़ा प्रोडक्शंस के साथ अपने काम के लिए जाना जाता है।स्क्रीनप्ले के मामले में उन्होनें 2003 से ओहियो के वेस्टरविले में ओटेरबिन विश्वविद्यालय में काफी काम किया है हालांकि इस यूनिवर्सिटी में अभिजीत जोशी अंग्रेजी के प्रोफेसर थे लेकिन उन्हें यही से स्क्रीनप्ले का चसका लगा था जो उन्होनें बॉलीवुड के दिग्गज निर्माताएं के साथ मिलकर पूरा किया।इसके लिए उन्हें लगे रहो मुन्ना भाई फिल्म के लिए बेस्ट स्क्रीन्प्ले का राष्ट्रीय अवॉर्ड मिला था।इसके अलावा आईफा,फिल्मफेयर, जी सीने के पुरस्कार उनके खाते में शामिल है।

विजय तेंदुलकरः कोल्हापुर, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में जन्में पद्मभूषण सम्मानित विजय तेंदुलकर भले ही आज हमारे बीच ना हो लेकिन वो एक मशहूर लेखक और अभिनेता थे।जिन्हें खास तौर पर फिल्म आक्रोश (1980), अर्ध सत्य (1983) और सामना (1975) के लिए जाना जाता है।इन फिल्मों के लिए उन्हें बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवॉर्ड मिल चुका है। एक प्रमुख भारतीय नाटककार, फिल्म और टेलीविजन लेखक, साहित्यिक निबंधकार, राजनीतिक पत्रकार और सामाजिक टीकाकार मुख्य रूप से मराठी फिल्मों में काम करते थे।लेकिन हिंदी सिनेमा में भी उन्हें ख्याति प्राप्त की है।

जयदीप साहनीः जयदीप साहनी चक दे पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं! इंडिया (2007), कंपनी (2002) और रब ने बना दी जोड़ी (2008) फिल्मों के लिए बेस्ट स्क्रीनप्ले अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके जयदीप साहनी भारतीय पटकथा लेखक, गीतकार और रचनात्मक निर्माता हैं।उन्हें स्क्रीन्पले  के लिए आईफा, गिल्ड और फिल्मफेयर से नवाजा जा चुका है।इसके लिए बेस्ट डायलॉग, बेस्ट लिरिक्स और स्टोरी के लिए भी जयदीप काफी चर्चा में आए।

बासु चटर्जीः ब्रिटिश भारत के अजमेर में जन्में बासु चटर्जी भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक हैं।जिन्हें कमाल की मौत, सारा आकाश, दुर्गा,स्वामी, रजनीगंधा (1974),जीना यहां जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।इन सभी फिल्मो के लिए वो स्क्रीनप्ले के तौर पर नवाजा जा चुके है उनके हिस्से में आईफा, फिल्मफेयर, जी सीने अवॉर्ड्स शामिल है।वही स्वामी के लिए उन्हें बेस्ट पॉपुरर फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

जूही चतुर्वेंदीःभारतीय सिनेमा की ये हस्ती मुख्यत एक भारतीय पटकथा लेखक और विज्ञापन पेशेवर हैं।जिन्होनें खास तौर पर विक्की डोनर पीकू, और अक्टूबर जैसी फिल्में लिखी है।वही फिल्म पीकू के लिए जूही को बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।उनके हिस्से में पीकू और विक्की डोनर के लिए कई अवॉर्ड्स शामिल है।जिन्होनें दो ही फिल्मों से अपनी खास पहचान बनाई है।

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