अपने खाने में ऐसे कम करें ट्रांस फैट, जानिए क्यों

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ट्रांस फैट हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है इसलिए इसे धीमा जहर भी बोला जाता है. रोजमर्रा में खाद्य ऑयल जैसी प्रयोग होने वाली बुनियादी चीजों में ही यह पाया जाता है, लेकिन आमतौर पर लोगों में इससे होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी कम होती है.

ट्रांस फैट असंतृप्त वसा (फैट या चर्बी) का एक रूप है. इसे ट्रांस फैटी एसिड के नाम से भी जाना जाता है. ट्रांस फैट केक, कुकीज, बिस्किट, डोनट्स, फास्ट फूड व क्रीम से बने अन्य रेडिमेड फूड आइटम्स में अधिक होता है. यदि समोसे, कचौड़ी या पकौड़े जैसी तली हुई चीजें बनाने में प्रयोग हुए एक बार तले ऑयल का दोबारा या बार-बार प्रयोग हो तो इसमें भी ट्रांस फैट होता है.

अगर भोजन में इसकी अधिकता होती है तो मनुष्य के शरीर में बेड कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल की मात्रा बढ़ती है व गुड कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल की मात्रा कम हो जाती है. ट्रांस फैट के कारण दिल की बीमारियों हाइपरटेंशन, फैट की चर्बी व डायबिटीज की आशंकाएं बढ़ जाती हैं.

एम्स के डाक्टर उमर अफरोज के मुताबिक, इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन खानपान संबंधी एक प्रकार की बीमारी है. इंसान को ऐसी चीजें खाने की आदत पड़ जाती है, जो उसकी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है.

ट्रांस फैट दो रूपों में पाए जाते हैं– प्राकृतिक व कृत्रिम. प्राकृतिक ट्रांस फैट पशु उत्पादों में पाए जाते हैं व उचित मात्रा में लेने पर हानिकारक नहीं माने जाते हैं. इसमें दूध, पनीर, घी व दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ, अंडे, मांस आदि शामिल हैं. इसकी ज्यादा मात्रा लेने पर नुकसानदायक होने कि सम्भावना है. इसे सैचुरेटेड फैट भी बोला जाता है.

दूसरा ट्रांस फैट है आर्टिफिशियल यानी कृत्रिम ट्रांस फैट. यह प्रोसेस करके तैयार किए गए तेल, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ आदि में मिलता है. ऑयल को बार-बार गर्म करने पर उसमें कृत्रिम ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ जाती है. यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु दिल की बीमारी के कारण होती है व यह रोग शरीर में ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होने के कारण होता है. दुनिया स्वास्थ्य संगठन ने 15 मई 2018 को एक गाइडलाइन जारी की, जिसका उद्देश्य वर्ष 2023 तक खाद्य पदार्थों में से ट्रांस फैट एसिड को समाप्त करना है. संगठन ने जो पैमाने तय किए हैं उसके अनुसार हम भोजन के रूप में जितनी ऊर्जा ग्रहण करते हैं, उसमें ट्रांस फैट्स की मात्रा 1 फीसदी से भी कम होनी चाहिए.

अपने खाने में ऐसे कम करें ट्रांस फैट-
-पॉपकॉर्न, चिप्स, कुकीज, बिस्किट, फ्रोजन फूड जैसे खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट होता है. इन्हें अपने खानपान में नजरअंदाज कीजिए.
-खाने में ट्रांस फैट को कम करने के लिए फ्राइड फूड से दूरी बनाएं.
-बटर व मार्जरीन यानी नकली मक्खन का प्रयोग न करें.
-आप ज्यादा चर्बी वाले मीट के बजाए अंडा, फिश व चिकन का इस्तेमाल करें.
-दूध में ट्रांस फैट बहुत ज्यादा कम मात्रा में पाया जाता है. लो फैट मिल्क का इस्तेमाल करना लाभकारी होने कि सम्भावना है.
-फल व सब्जियां खूब खाएं, क्योंकि यह ट्रांस फैट से होने वाले नुकसान से बचा सकती हैं.
-इन्स्टेन्ट मिक्स या रेडी टू यूज फूड का प्रयोग करने से बचें, क्योंकि उनमें ट्रांस फैट की बहुत ज्यादा मात्रा हो सकती है.
-समोसा, पराठा, फ्रेंच फ्राइज़,आलू पूड़ी, छोले भटूरे, आलू टिक्की, बर्गर, पिज्जा, सैंडविच आदि में ट्रांस फैट बहुत ज्यादा होते हैं. इन्हें अवॉइड करें.

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