चाणक्य की इन बातों का जीवन में रखें हमेंशा ध्यान, मिलेगी सफलता

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जयपुर –यदि कोई व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाना चाहता है तो वह चाणक्य की नीतियों से सीख ले सकता है। आचार्य चाणक्य ने न सिर्फ राजनीति बल्कि सफल जीवन गुजारने का भी सूत्र दिया है। आइए आज हम आपको चाणक्य के द्वारा जीवन से संबंधित कुछ श्लोक के बारे में बताएंगे।

स्नेह का कर दें त्याग

चाणक्य के अनुसार, मनुष्य को जिस से प्रेम होता है उसी से भय भी होता है । प्रेम ही सारे दुःखों का मूल है, अतः प्रेम के बंधनों को तोड़कर सुखपूर्वक रहना चाहिए। अर्थात जिसके ह्रदय में स्नेह है उसे भय लगता है, स्नेह दुःख का पात्र अर्थात हिस्सा होता है, सभी दुःख का मूल ही स्नेह है। इसलिए इस दुःख (यानी कि स्नेह) का त्याग करते हुए सुख से जीवन गुजारना चाहिए ।

ऐसे होती है व्यक्ति की पहचान

चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार, आचरण से व्यक्ति के कुल का परिचय मिलता है । बोली से देश का पता लगता है। आदर-सत्कार से प्रेम का तथा शरीर को देखकर व्यक्ति के भोजन का पता चलता है। चाणक्य नीति के अनुसार, मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य के बोल चाल से उसके देश की प्रसिद्धि बढ़ती है, मान सम्मान उसके प्रेम को बढ़ाता है, और उसके शरीर का गठन उसके भोजन से बढ़ता है।

अच्छी पत्नी के गुण

एक श्लोक के अनुसार, असल में वही स्त्री सच्चा पत्नी धर्म निभाती है जो गृहकार्य में दक्ष हो यानी जिसे घर के काम आते हैं। साथ ही जो स्त्री प्रियवादिनी है, जिसके प्राण पति में बसते हो और जो  और पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है। जो पवित्र और कुशल हो वही पत्नी है।

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