Saluting The Legends : भारत भूषण

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भारत भूषण का जन्म 14 जून 1920 को मेरठ उत्तर प्रदेश में हुआ। भारत भूषण के  पिता रायबहादुर मोतीलाल मेरठ में  सरकारी वकील थे। भारत भूषण जब  दो साल के थे तब उनकी मां का निधन हो गया। भारत के बड़े भाई रमेश चंद्र  फिल्म निर्माता थे। भारत भूषण ने अपनी पढाई धर्म समाज कॉलेज से की । उसके बाद भारत ने अभिनय में अपना हाथ आज़माना चाहा। भारत ने कोलकाता जाकर सिनेमा के गुण सीखे उसके बाद वह मुंबई चले गए।

मुंबई आने के बाद भी भारत को काम  नहीं मिल रहा था काफी मेहनत करने के बाद उन्हें फिल्म चित्रलेखा में काम करने का मौका मिला यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी कामयाब रही। हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने एक दशक तक संघर्ष किया। फिर साल 1952 में आई फिल्म बैजू बावरा ने उन्हें रातों रात बुलन्दियो पर पंहुचा दिया। भारत भूषण ने 90s तक हिंदी  फ़िल्मो में काम किया।

भारत भूषण की फ़िल्मो की अगर बात करे तो उन्होंने कई बेहतरीन फ़िल्मो में अभिनय किया जिनमे बाई बहन , चित्रलेखा , ऑंखें , शबाब, मिर्ज़ा ग़ालिब, मीनार , श्री चैतन्य महाप्रभु, खून पसीना, कहानी किस्मत की , माँ, अभी तो में जवान हु, बरसात की रात , प्यार का मौसम आदि फिल्मो में भारत भूषण ने काम किया वह काफी कामयाब अभिनेता में एक रहे लेकिन बाकि अभिनेता जितना नाम नहीं मिल पाया।

भारत भूषण की निजी जिंदगी की अगर बात करे तो उन्होंने मेरठ के एक नामी  परिवार, जमींदार रायबहादुर बुद्ध प्रकाश की बेटी सरला से शादी की। उनके को बच्चे हुए , दोनो बेटियां थीं, अनुराधा और अपराजिता। भूषण की पत्नी सरला अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के दौरान आई  जटिलताओं के चलते उनकी मौत हो गयी। उसके बाद उन्होंने अभिनेत्री रतना से शादी कर ली।भारत भूषण का सितारा भी कभी इतनी गर्दिश में पड़ गया था कि उन्हें अपना गुजारा चलाने के वास्ते दोयम दर्जे की फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं करने को मजबूर होना पड़ा था। भारत भूषण को फ़िल्मों में काम मिलना लगभग बंद हो गया। तब मजबूरी में उन्होंने छोटे परदे की तरफ रुख किया और दिशा तथा बेचारे गुप्ताजी जैसे धारावाहिकों में अभिनय किया।

भारत भूषण को 1955 में फिल्म चैतन्य के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर आवार्ड दिया गया। भारत भूषण की जिंदगी के कुछ आखिरी सालो में उन्हें अपनी किताबो को बेच कर गुज़ारा करना पड़ा। 27 जनवरी 1992 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। और एक महान कलाकार के रूप में अपनी एक अमर छाप छोड़ गये।

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