सिस्टम के खिलाफ तापसी ने जाहिर की नाराजगी, जानें फिल्मी करियर में करना पड़ा किन मुसीबतों का सामना

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बॉलीवुड की मशहूर युवा अभिनेत्री तापसी पन्नू इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म थप्पड़ के प्रमोशन में काफी व्यस्त है। तापसी पन्नू की अपकमिंग फिल्म थप्पड़ इसी महीने 28 फरवरी 2020 को रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म का ट्रेलर कुछ समय पहले ही रिलीज किया जा चुका है। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। वही बात करें फिल्म थप्पड़ की स्टारकास्ट की, तो इस फिल्म में तापसी पन्नू के अलावा पवैल गुलाटी, नैला ग्रेवाल, तन्वी आजमी, सुशील दहिया जैसे ही कई सितारे अहम भूमिका में नजर आने वाले है। वही इसी बीच तापसी पन्नू ने हाल ही में दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कई मुद्दो पर खुलकर बात की है।

तापसी पन्नू को पूरा भरोसा है कि उनकी फिल्म ‘थप्पड़’ जरूर सफल होगी। तापसी के इस भरोसे की वजह है उनकी ‘पिंक’, ‘मुल्क’ और ‘बदला’ जैसी फिल्में जिनको बॉक्स ऑफिस पर काफी सफलता मिली। जब तापसी से सवाल पूछा गया कि अब नायिकाओं के नामों से भी फिल्मों को पहचान मिलने लगी है, इस परिवर्तन का मुख्य कारक आप क्या मानती है? तो तापसी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि पहले साल में एक या दो फिल्में औरतों को केन्द्र में रख कर बनाई जाती थी लेकिन आज महीनों में दो-तीन फिल्में ऐसी देखने को मिलती है, यह बहुत ही गजब का बदलाव है। वह आगे कहती है कि जनता ऑनलाइन कंटेंट को देखकर जागरूक हो गई है, अब वह दस साल पुराने विषय की फिल्में सिरे से नकार देते हैं।

वह कहती है कि इसी वजह से इस नए दौर में महिला आधारित फिल्में आने लगी हैं, मुझे लगता है कि हमने इस विषय पर पहले काम ही नहीं किया था। हमारे यहां एक अभिनेता की जो फीस होती है वह हमारी फिल्मों का पूरा बजट होता है।फिल्में चुनते समय किन बातों को ध्यान में रखना पड़ता है इसको लेकर तापसी का कहना है कि मैं सिर्फ एक ही बात ध्यान रखती हूं कि क्या मैं इस फिल्म को अपनी मेहनत की कमाई के 500 रुपये लगाकर देख सकती हूं या नहीं। अपनी जिंदगी के वापस ना लौटने वाले तीन घंटे मैं इस फिल्म पर लगाऊंगी या नहीं, पैसा तो मैं फिर भी कमा लूंगी लेकिन वह समय वापस नहीं आ सकता है। वह आगे कहती है कि लोगों का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मेरा समय, इसलिए मैं हमेशा यही चाहती हूं कि लोगों का समय और पैसा बर्बाद ना हो।

मायानगरी की भागदौड़ में दिल्ली को मिस करने वाले सवाल पर तापसी ने बताया कि मेरी जिंदगी का पूरा आधार दिल्ली ने ही बनाया है। वह कहती है कि आप लड़की को दिल्ली से बाहर निकाल सकते हैं लेकिन दिल्ली को लड़की से बाहर नहीं निकाल सकते हैं। उनका कहना है कि मैं हमेशा से दिल्ली की रही हूं और हमेशा दिल्ली की ही रहूंगी, मुंबई मेरी कर्मभूमि है लेकिन मेरी जन्मभूमि तो हमेशा दिल्ली ही रहेगी। मेरी पहचान दिल्ली से ही है और मुझे उस पर गर्व है। व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करने वाले कलाकारों में शामिल होना फिल्मी करियर तापसी के लिए कितना जोखिमभरा रहा इसको लेकर उनका कहना है कि मैं अपनी रीढ़ बेच कर गुजारा नहीं कर सकती। वह कहती है कि मेरा तर्क सिर्फ इतना था कि जब हमारी फिल्में आती हैं तब हम ऐसे ही कॉलेजों में अपनी फिल्म प्रमोशन के लिए जाते हैं।

घर से मिले पैसे से वे हमारी फिल्में देखते हैं, अब अगर उन्हीं छात्रों के साथ हिंसा हुई है और अगर हम इसकी आलोचना भी ना करें तो यह तो सही नहीं होगा। मैं जेएनयू या जामिया से तो नहीं पढ़ी हूं, मेरी पढ़ाई इंद्रप्रस्थ से हुई है लेकिन मैं यह बात समझती हूं कि अगर मेरे कॉलेज में आकर अगर कोई मेरा सिर फोड़ दे तो वह बहुत बड़ा धक्का होगा मेरे लिए। यह किसी भी विचारधारा की बात नहीं है, यह सही और गलत के बारे में है। थप्पड़ के विषय में अपनी अनुभूति को लेकर तापसी कहती है कि आज की तारीख में पांच में से तीन औरतों के साथ यह होता है लेकिन ज्यादातर लोग बेइज्जती के डर से इसके बारे में बात नहीं करते। उनका कहना है कि थप्पड़ की पटकथा जब मुझे पहली बार मिली तो इसे पढ़कर मैं बहुत रोई थी। इतना ही नही उन्होंने आगे बताया कि कलाकार के तौर पर अगर मेरे पास ताकत है तो उसका इस्तेमाल करके मुझे ऐसा मुद्दा उठाना ही चाहिए।

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